【 RNI-HIN/2013/51580 】
【 RNI-MPHIN/2009/31101 】
23 Apr 2026

सीएम हाउस के साये में नो-प्रोटेस्ट ज़ोन: कश्मकश मे पुलिस,आवाज़ रुके या रास्ता?
Anam Ibrahim
Journalist 007
7771851163
धारा दफ़ा-163 का शिकंजा पॉलीटेक्निक चौराहे पर आकाशवाणी से किलोल पार्क तक बंद धरना-प्रदर्शन, हुकूमती निज़ाम बोले ‘इमरजेंसी रूट’, अवाम पूछे फिर हक़ की राह कहाँ?
Jansampark Life
जनसम्पर्क Life
ख़बर CP दफ़्तर से.............
Bhopal/Mp: भोपाल का पॉलीटेक्निक चौराहा जहाँ चार रास्ते मिलते हैं,अब वहाँ इख़्तिलाफ़ (विरोध) नहीं मिलेगा।
पुलिस कमिश्नर का ऑर्डर कहता है धरना-प्रदर्शन मना है।
मगर.....
बहरहाल दिनांक 22/04/2026, दफ़्तर पुलिस आयुक्त, शहरी पुलिस भोपाल
कमिश्नर संजय कुमार के दस्तख़त से जारी आदेश ने
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के तहत पॉलीटेक्निक चौराहा और उसके इर्द-गिर्द
आकाशवाणी चौराहा से किलोली पार्क चौराहा तक के पूरे बेल्ट को
धरना, घेराव, प्रदर्शन, आंदोलन, पुतला दहन सबके लिए प्रतिबंधित कर दिया।
हुक्म का तर्क मुकम्मल है
ये वही नाड़ी है जहाँ से एयरपोर्ट, हमीदिया अस्पताल, गांधी मेडिकल कॉलेज की सांस चलती है,एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, वीआईपी मूवमेंट सब इसी रग से गुजरते हैं।
जाम यहाँ सिर्फ़ जाम नहीं, जिंदगी पर बोझ बनता है।
कानून अपनी जगह बेहद वाजिब।
मगर यहीं एक साया और है..
यही चौराहा मुख्यमंत्री निवास (CM House) के सामने है
सूबे के वज़ीर का हुकूमती आशियाना।
तो क्या वजह सिर्फ़ ट्रैफिक है…
या इख़्तिलाफ़ की गूंज का रास्ता भी यहीं से काटा गया है?
काग़ज़ कहता है नो गैदरिंग, नो डिसरप्शन।
संविधान कहता है
Peaceful Assembly is a Right.
और ज़मीन पर खड़ा आदमी पूछता है
जब हर अहम मोड़ ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’ हो जाए, तो हक़ की आवाज़ किस मोड़ पर खड़ी हो?
यहाँ से रास्ते निकलते हैं
वज़ीरख़ाने से विधानसभा तक
PHQ से अदालत तक
हॉस्पिटल से कब्रिस्तान तक
हर राह की मंज़िल अलग, मगर दर्द एक गुज़रना ज़रूरी है।
अब उसी चौराहे पर रुकना मना है, बोलना मना है।
हुकूमत इसे Public Order कहती है,
अवाम इसे Public Silence।
कानून का पाठ साफ़ है
अनुमति लो, तय जगह जाओ, शांति रखो।
मगर सियासत का साया पूछता है
तय जगह वही क्यों, जहाँ कोई सुनने वाला न हो?
ये फ़रमान शहर को राहत देगा या आवाज़ को राहत से दूर करेगा?
पॉलीटेक्निक चौराहा अब सिर्फ़ ट्रैफिक का जंक्शन नहीं
ये हक़ और हुक्म के बीच खिंची लकीर है।
अब देखना ये है
कानून रास्ता बचाता है....
या रास्ते से आवाज़ हटा देता है?
सीधी बात भारत में धरना/प्रदर्शन करना अधिकार भी है, लेकिन पूरी तरह खुला नहीं उस पर क़ानूनी शर्तें और सीमाएँ भी हैं। नीचे सिर्फ़ नियम और अधिकार
संवैधानिक अधिकार (Fundamental Rights)
1. अनुच्छेद 19(1)(a)
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
→ अपनी बात, विरोध, मांग सार्वजनिक रूप से रखने का हक
2. अनुच्छेद 19(1)(b)
शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार
→ धरना, प्रदर्शन, रैली करने का बेसिक हक
3. अनुच्छेद 19(1)(c)
संगठन/संघ बनाने का अधिकार
→ यूनियन, संगठन बनाकर आंदोलन करना
लेकिन ये अधिकार Absolute नहीं हैं
सरकार इन पर उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगा सकती है:
अनुच्छेद 19(2) & 19(3) के तहत
कारण:
* कानून-व्यवस्था (Public Order)
* राज्य की सुरक्षा (Security of State)
* नैतिकता (Morality)
* संप्रभुता और अखंडता (Sovereignty)
ज़रूरी नियम / शर्तें
1. Permission (अनुमति)
सार्वजनिक जगह पर धरना/प्रदर्शन के लिए पुलिस/प्रशासन से अनुमति जरूरी होती है
2. Designated Place (निर्धारित स्थान)
हर जगह प्रदर्शन की इजाज़त नहीं
प्रशासन तय करता है कहाँ allowed है
3. शांतिपूर्ण होना चाहिए
हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी ❌
हथियार लेकर आना ❌
4. Traffic / Public Disruption
सड़क जाम करना, एम्बुलेंस रोकना ❌
5. धारा 144 / 163 जैसे आदेश
अगर लागू है किसी भी तरह का जमावड़ा illegal हो जाता है
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले
1. Himat Lal Shah vs Commissioner of Police (1973)
सरकार पूरी तरह रोक नहीं सकती, लेकिन regulate कर सकती है
2. Mazdoor Kisan Shakti Sangathan vs Union of India (2018)
प्रदर्शन अधिकार है, पर संतुलन जरूरी (जनता को दिक्कत नहीं होनी चाहिए)
3. Amit Sahni vs Commissioner of Police (Shaheen Bagh case, 2020)
सार्वजनिक सड़कों को अनिश्चित समय तक ब्लॉक नहीं कर सकते
कब अवैध (Illegal) हो जाता है?
बिना अनुमति प्रदर्शन
प्रतिबंधित क्षेत्र में (जैसे पॉलीटेक्निक चौराहा जैसा ऑर्डर में लिखा है)
हिंसक या उकसाने वाला प्रदर्शन
सरकारी आदेश (जैसे धारा 144/163) का उल्लंघन
ज़नाब फैसले का स्वागत है बस प्रदेश के मुखिया के दरबार के इर्दगिर्द अब सामूहिक पीड़ा की आवाज़े नही गूंजेगी रास्ते खुलेंगे राहत मिलेगी बस ये आदेश हमीदिया चिकित्सालय के इर्दगिर्द भी तामिल होना चाहिए
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