【 RNI-HIN/2013/51580 】
【 RNI-MPHIN/2009/31101 】
23 Apr 2026

फरारी की फ़ैक्ट्री बना निशातपुरा: ‘चपाती’ 8 साल कानून को सेंकता रहा और इटखेड़ी में घर बसा के बेखौफ़ जीता रहा
Anam Ibrahim
Journalist
7771851163
फरारी की पनाहगाह तक मुखबिर की रौशनी से पहुचे थाना निशातपुरा पुलिस के क़दम : 8 साल तक ‘चपाती’ कानून को आमने सामने सेंकता रहा, अब पुलिस ने तवा पलट दिया
छुरियों की खनक, वारंटों की धूल और झुग्गियों की नज़रअंदाज़गी में पलता खौफ.. गिरफ्तारी हुई, मगर सवाल अब भी जिंदा हैं ये पनाहगाह किसकी है?
BBC OF INDIA
ख़बर Ps निशातपुरा भोपाल........
Bhopal/Mp: भोपाल का एक इलाका नाम तो महज़ निशातपुरा मगर हालात ए ज़ुर्म के किस्से ऐसे कि जैसे शहर के सीने में कोई ख़ुफ़िया अड्डा धड़क रहा हो। यहां जुर्म सिर्फ होता नहीं पलता है, बढ़ता है, और फिर फरारी की चादर ओढ़कर सालों तक कानून को आंख दिखाता है। और जब पुलिस पकड़ती है तो कहानी खत्म नहीं होती असली किस्सा वहीं से शुरू होता है।
जी हां
निशातपुरा थाना जहां अपराध के आंकड़े भी बढ़ते हैं और कार्रवाई के प्रेस नोट भी। ऊपर से आला अफसरों मयूर खण्डेलवाल, मलकीत सिंह और अक्षय चौधरी के सख्त निर्देश:
“चाकूबाजों पर नकेल कसो”
साहब फिर कागज़ पर सब दुरुस्त
ज़मीन पर तस्वीर थोड़ी मुरझाई हुई।
इस कहानी का किरदार:
इरफान खान उर्फ “चपाती”
उम्र 26 साल..
नाम हल्का, मगर फाइल भारी।
2018 से फरार..
मतलब पूरे 8 साल
कानून के साथ लुका-छिपी का ‘ओपन वर्ल्ड गेम’ खेलता रहा।
5 स्थाई गिरफ्तारी वारंट.
1 सामान्य वारंट..
और फिर भी जनाब हवा में ऐसे घुले कि जैसे कोहरे में गुम साया।
गिरफ्तारी का सीन:
21 अप्रैल 2026
मुखबिर की खबर आई
माल घर पे है..
थाना प्रभारी मनोज पटवा और टीम ने बिना शोर किए silent entry मारी
और जो 8 साल से सिस्टम को चकमा दे रहा था
उसे उसी के ठिकाने से ऐसे उठाया गया जैसे नींद से कोई खौफनाक ख्वाब झकझोर कर जगा दे।
जुर्म का काला हिसाब:
ये कोई petty criminal नहीं
इसकी फाइल में दर्ज है:
छुरीबाजी अड़ीबाजी, मारपीट
अवैध हथियार बलात्कार
POCSO एक्ट के संगीन आरोप
यानी
एक शख्स नहीं, चलता-फिरता खौफनामचा।
अब सवाल ये नहीं कि गिरफ्तारी हुई या नहीं
सवाल ये है कि
आखिर 8 साल तक ये फरारी किसकी छत के नीचे पल रही थी?
निशातपुरा का इलाका
जहां अपराध बढ़ता भी है, और कार्रवाई भी होती है
मगर बीच में एक खाली जगह है
वो जगह जहां
अपराधी छुपते नहीं
बस आराम से रह लेते हैं।
इटखेड़ी अरवलिया की झुग्गियां
तंग गलियां.
खामोश दीवारें..
यहां कोई भी ‘चपाती’ बन सकता है
बस थोड़ा वक्त, थोड़ी बेफिक्री, और सिस्टम की हल्की सी नींद चाहिए।
वैसे मजमुन मे पुलिस का किरदार है:
इंस्पेक्टर मनोज पटवा और उनकी टीम राजेन्द्र सोलंकी, सतेन्द्र चौबे, राजेन्द्र राजपूत, मनदीप जाट, लक्ष्मण ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।
कार्रवाई काबिले-तारीफ है
मगर कहानी सिर्फ गिरफ्तारी की नहीं है
उस खामोशी की भी है, जिसमें ये फरारी 8 साल तक सांस लेती रही।
जाने दो जनाब, यहां अपराध पकड़े भी जाते हैं और पनपते भी है
फर्क बस इतना है
पकड़ने पर ख़बर बनती है,
और पनपने पर खामोशी।
#AnamIbrahim #AnamIbrahimJournalist #BBCofIndia
मध्यप्रदेश जुर्मे वारदात गम्भीर अपराध ताज़ा सुर्खियाँ खबरे छूट गयी होत
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